गुरुवार, 1 नवंबर 2018

दिवाली 2018 -दिवाली क्यों मनाई जाती है,दीवाली कैसे, क्यों और कब मनाई जाती,Diwali-kyu-Manaya-jata-hai

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Divali


दिवाली


आखिर क्यों मनाई जाती है दीपावली? 



भारत एक ऐसा देश है जिसको त्योहारों का देश कहा जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार भारत में कुल 33 करोड़ देवी-देवता हैं, और इसी कारण हमेशा किसी ना किसी महीने या दिन  त्यौहार का माहौल तो बना ही रहता है। इन्हीं पर्वों में से एक खास पर्व है दीपावली और इसे हिन्दुओ का मुख्य त्यौहार माना जाता है जो दशहरा के 20 दिन बाद आता है।


नमस्कार दोस्तों मैं अनुपम सिंह और आपका आज के इस आर्टिकल में स्वागत है।आज मैं इस आर्टिकल में दीवाली से सम्बंधित कुछ बाते बताने वाला हूँ।अगर आपको यह article पसंद आये तो कृपया और भी लोगो तक शेयर करे।


दीपावली का अर्थ



दिवाली एक धार्मिक त्योहार है,जो अंधकार पर प्रकाश की विजय या फिर पाप या अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी लोग बहुत सारे दीपक जला कर रोशनी  फैलाते हैं  और खुशिया मनाते है, कि उन्होंने अंधकार पर अपनी प्रकाश का विजय प्राप्त कर ली है । वैसे तो मुख्यत यह त्यौहार भारत में मनाया जाता है लेकिन भारत के बाहर कुछ स्थानों पर यह त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है 
 इस त्यौहार को मुख्यतः हिंदू और जैन धर्म के लोग मनाते हैं । दीपावली के दिन बहुत से देशों जैसे भारत,  नेपाल , श्रीलंका  और सिंगापुर आदि देशों में राष्ट्रीय अवकाश भी रहता है ।


दिवाली कैसे मनाई जाती है,देव दीपावली क्यों मनाई जाती है




आपको बता दें कि दीपावली जिस भी date को होती है वह हिंदू चंद्र सौर कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाती है और इसी दिन बड़े हर्षोल्लास के साथ दीवाली के त्यौहार को मनाया जाता है । यह अलग-अलग तरह से मनाया जाता है यानी कि इनको मनाने की विधि अलग-अलग होती है।  अलग अलग परिवारों में इसे अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है लेकिन यह त्यौहार लगभग एक समान ही सब मनाते है ।


दीवाली का महत्व



दिवाली 2018 -दिवाली क्यों मनाई जाती है,दीवाली कैसे, क्यों और कब मनाई जाती है।

दीपावली एक ऐसा हिंदू त्यौहार है जो हर हिंदू धर्म के परिवार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते है । दीवाली वैसे तो सिर्फ पांच दिनों का त्योहार है जैसा कि आपने पहले ही  पढ लिया होगा कुछ जगहों जैसे महाराष्ट्र में 6 दिनों तक मनाया जाता है और इन 5 दिनों तक हिंदू लोग दीपावली बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं, लोग मिठाइयां, कपड़े,बर्तन,electric चीजे खरीदते हैं, घरों की सफाई करते हैं ,और नए काम की शुरुवात करते है, घरों में दीपक जलाते हैं।


 दीवाली के दिन मां लक्ष्मी-गणेश और कुबेर महाराज की पूजा करते है । इस दिन का हिन्दू धर्म में बहुत बड़ा महत्व है, ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में घरों परिवारों में ढेरो सुख समृद्धि शांति सब कुछ आता है  । 


हिंदू लोग इस त्यौहार का बेसब्री से इंतजार करते हैं और जब यह त्यौहार आता है तब लोग कुछ ना कुछ नए काम की शुरुआत करते हैं, क्योकि हिन्दू धर्म में यह मन जाता हैं कि अगर इस त्यौहार के दिन नए अपने काम की शुरुआत की जाए तो वह काम बहुत आगे बढ़ता और सफल होता है और उन्हें बहुत तरक्की होती है,और फायदा होता है ।


अब चलिए हम आपको बताते है  कि दीवाली की पूजा यानी लक्ष्मी-गणेश पूजा कब की जाएगी और गणेश जी की आरती और लक्ष्मी जी की आरती कब की जाएगी 2018 दीपावली में ।

 दिवाली 2018 में कब मनाई जाएगी किस तारीख को कौन सा दिन होगा सब कुछ हम आपको  बताने वाले है।

दीपावली  बुधवार 7 नवंबर 2018

धनतेरस सोमवार 5 नवंबर 2018

नरक चतुर्थी या छोटी दीपावली मंगलवार 6 नवंबर 2018

 दीपावली बुधवार 7 नवंबर 2018

बाली प्रतिस्पर्धा मतलब गोवर्धन पूजा गुरुवार 8 नवंबर 2018

यम द्वितीय या भाई दूज शुक्रवार 9 नवंबर 2018



दीपावली का त्यौहार मनाने का ऐतिहासिक और हिंदू पौराणिक कारण




दीपावली मनाने के कारण




1.रावण वध और श्रीराम का आगमन



श्री राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में 
यह कहानी सभी भारतीय लोगो को पता है कि हम श्री राम जी के 14 वर्ष के वनवास से लौटने की खुशी में दिवाली मनाते हैं। मंथरा के गलत कपटी विचारों से पीड़ित हो कर भरत की माता कैकई ने  श्री राम को उनके पिता राजा दशरथ से वनवास भेजने के लिए वचनवद्ध कर देती हैं। इस लिए श्रीराम अपने पिता के आदेश का सम्मान करते हुए माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास के लिए चले जाते हैं। और वहीं वन में रावण अपना संकल्प पूरा करने के लिए माता सीता का छल से अपहरण कर लेता है।

हिंदू धर्म के महाकाव्य रामायण के अनुसार जब लंका में राम और रावण का युद्ध हुआ था तब उसमें श्री राम ने रावण का वध करके रावण और लंका पर विजय प्राप्त कर लिया था, और अपनी पत्नी माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे , 

श्री राम और माता सीता और लक्ष्मण के वापस अयोध्या आने की ख़ुशी में अयोध्या वासियों ने अपने घरों में सजावट की थी और साथ ही मिट्टी के दीपक जलाकर खुशियां मनाई थी । हिंदू धर्म के लोग उसी दिन को याद करते हुए आज भी दीवाली के रूप में उस खुशि को मनाते हैं ।




2.सिक्खों के छः वे गुरु को मिली थी, आजादी



मुगल बादशाह जहांगीर ने सिखों के 6वें गुरु गोविंद सिंह सहित 52 राजाओं को ग्वालियर के किले में बंदी बना कर रख्खा था। गुरू गोविन्द सिंह को कैद करने के बाद जहांगीर मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। जहांगीर को स्वप्न में गुरु गोविन्द जी को कैद से आजाद करने के लिए किसी फकीर से आदेश मिलाता था।

 जब गुरु गोविन्द जी को कैद से आजाद किया जा रहा था तो वे अपने साथ कैद हुए सभी राजाओं को भी आजाद करने की मांग करने लगे। गुरू हरगोविंद सिंह के कहने पर जहांगीर ने सभी राजाओं को भी कैद से आजाद कर दिया था । इसी कारण इस त्यौहार को सिख समुदाय या धर्म के लोग भी मनाते हैं।




3.भगवान विष्णु द्वारा लक्ष्मी जी को बचाना



हिंदू धर्म के पौराणिक कथाओं के अनुसार एक महान राक्षस दानव था जिसे राजा बलि या बाली भी कहा जाता है। उसने तीनों लोको को अपने अधिकार में कर लिया था और उनका राजा बन बैठा था।  भगवान विष्णु से उसे कई प्रकार की शक्तियां प्राप्त थी, जिसके चलते उसने तीनों लोक को अपने वश में कर लिया था या स्वामी बन गया था ।पूरे विश्व में गरीबी छा गई थी क्योंकि राजा  बाली  ने सारी संपत्ति को अपने अधिकार में ले लिया था स्वामी बन गया था ।

क्योंकि उसने माता लक्ष्मी से वरदान ले कर अपने अधिकार में ले रखा था । पूरे ब्रह्मांड को बाली से बचाने के लिए,   भगवान विष्णु ने अपने वामन अवतार यानी पांचवी अवतार को लेकर तीनो लोको बाली से दान में लेकर उसके अधिकार से मुक्त कराये थे और देवी लक्ष्मी को उसके कैद से मुक्त कराये थे । तब से यह दिन बुराइयों पर भगवान विष्णु की जीत के रूप में और देवी मां लक्ष्मी की आजादी के रूप में दीवाली के अवसर पर बड़े ही ख़ुशी के साथ मनाया जाता है ।


4.नरकासुर का संहार


नरकासुर का इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने संहार किया था। नरकासुर उस समय प्रागज्योतिषपुर (जो की आज दक्षिण नेपाल एक प्रान्त है) का राजा था। नरकासुर इतना क्रूर और दुष्ट था की उसने देवमाता अदिति के शानदार कान की बालियों तक को छीन लिया। श्री कृष्ण की मदद से सत्यभामा ने नरकासुर का वध किया और सभी 16 देवो की देवी कन्याओं को उसके कैद से आजाद करवाया था।


 5.माता लक्ष्मी का सृष्टि में अवतार 



हिंदुओं की मान्यताओ के अनुसार देवी माता लक्ष्मी को धन-शुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और इसी कारण सभी हिन्दू धर्म के लोग धन प्राप्ति के लिए माता लक्ष्मी का व्रत करते हैं,और उनकी पूजा करते हैं ।   आपको पता होगा, कि हिंदू कथाओं के अनुसार राक्षस और देवताओं ने मिल कर समुद्र मंथन किया था या क्षिर सागर का मंथन किया था और उसी मंथन में देवी लक्ष्मी प्रगट हुई थी । 

अमावस्या के दिन जो कार्तिक महीना था। उसी दिन देवी लक्ष्मी ब्रह्मांड में प्रगट या अवतरित हुई थी और इसी लिए इस दिन को माता देवी लक्ष्मी के जन्मदिन के उपलक्ष में भी दीपावली के त्यौहार के रूप में मनाया जाने लगा ।


6. राजा विक्रमादित्य का हुआ था राज्याभिषेक


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राजा विक्रमादित्य एक महान और धर्मवीर हिंदू राजा थे। और इसी दिन राजा विक्रमादित्य का राज्यभिषेक किया गया था और विक्रमादित्य के राज्याभिषेक के दिन को दीवाली के रूप में उनके चाहने वालों ने मनाना शुरू कर दिया ।
महान राजा विक्रमादित्य प्राचीन भारत के एक महान और धर्मवीर सम्राट थे। उन्हें उनके उदारता, साहस तथा विद्वानों के संरक्षणों के कारण हमेशा जाना जाता है इसी कार्तिक अमावस्या के दिन उनका राज्याभिषेक किया गया था। राजा विक्रमादित्य मुगलों को धूल चटाने वाले भारत के अंतिम हिंदू सम्राट थे।


7.पांडवों की राज्य वापसी



आप सभी ने महाभारत की कहानी तो सुनी ही होगी। कौरवों ने, शकुनी मामा के चाल की मदद से शतरंज के खेल में पांडवों का सब कुछ छीन लिया था। यहां तक की उन्हें राज्य छोड़ कर 13 वर्ष के लिए वनवास भी जाना पड़ा।  और   लंबे समय बाद यानी 13 वर्ष के बाद पांडव जब अपने राज्य कार्तिक अमावस के इसी महीने में वापस लौटे तो इसी कार्तिक अमावस्या के रात यानि दीवाली के दिन उनके चाहने वालो ने खूब खुशिया मनाई । पांडवो के चाहने वालो ने अपने घरों में मिट्टी के दीपक जलाकर  पटाखे फोड़ पांडवों के वापस लौटने की खुशियां मनाई  दीपावली के रूप में ।



8.मारवाड़ी का नया साल



हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन  इस हिंदू त्योहार दीपावली पर मारवणी लोग अपने नए साल का जश्न भी मनाते हैं  ।


9.जैनियों के लिए विशेष दिन



महावीर जिनके द्वारा आधुनिक जैन धर्म की स्थापना की गयी थी
। उन्होंने इस विशेष दीपावली के दिन पर अपने निर्वाण की प्राप्ति की थे, और इसी कारण जैनियों द्वारा यह दिन दीपावली के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ।



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हिंदू कैलेंडर के अनुसार अश्विन के महीने में कृष्ण पक्ष की के 13 वें दिन  दीपावली के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है । यह परंपरागत रूप से हर वर्ष के मध्य अक्टूबर या मध्य नवंबर में दशहरे के 18 दिन बाद खुशियों के साथ मनाया जाता है ।  यह हिंदुओं का मुख्य त्योहार माना जाता है।
पूरे भारत में यह 5 दिनों का त्योहार है । धनतेरस से लेकर भाई दूज तक का , लेकिन कुछ स्थानों जैसे कि महाराष्ट्र में यह 6 दिन तक मनाया जाता है। यह अपने परिवार के साथ मनाया जाता है और इसी दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाता है ताकि लोग अच्छे से दीवाली के त्यौहार को मना सके और आनंद ले सकें ।

तो अब आप सब लोगों को पता चल गया होगा कि दीपावली ,क्यों मनाया जाता है ?कब मनाया जाता है ? दीवाली क्या है ?दीवाली के बारे में आपको पूरी जानकारी मिल गई होगी !


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दिवाली एक धार्मिक त्योहार है जो अंधकार पर प्रकाश का विजय या फिर पाप या अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में मनाया जाता है।  इस दिन सभी लोग बहुत सारे दीपक जलाकर पुरे संसार में उजाला फैलाने की कोशिश करते है !

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