मंगलवार, 30 अक्तूबर 2018

एक ऐसा भी वीर शहीद था जो शहीद होने के बाद भी जिसकी शहीद आत्मा भारत-चीन सीमा पर देश और देश के जवानों की रक्षा करती थी।

एक ऐसा भी वीर शहीद था जो शहीद होने के बाद भी जिसकी शहीद आत्मा भारत-चीन सीमा पर देश और देश के जवानों की रक्षा करती थी।
ऐसा देश का जवान जो सिर्फ 22 साल की उम्र में ही शहीद हो गया ।और शहीद होने के बाद भी उसकी शहीद आत्मा देश और देश के जवानों और लोगो की रक्षा करती रही,क्या एक सैनिक सहादत के बाद लौट के अ सकता है।

Baba harbhajan singh,एक ऐसा भी वीर शहीद था जो शहीद होने के बाद भी जिसकी शहीद आत्मा भारत-चीन सिमा पर देश और देश के जवानों की रक्षा करती थी।
Baba harabhajan singh

एक ऐसा सेना का जवान जिसके मौत के बाद भी उसे तनख्वाह दिया जा रहा था सेना के नियमो के अनुसार उसे प्रमोशन और छुट्टिया दी जाती और उसे सेना से रिटायर भी किया गया। एक ऐसा सैनिक जो दिखता नहीं लेकिन फिर भी तैनात रहता है।

दोस्तों इस वीर जवान की कहानी जरूर पढियेगा,इस जवान की ये कहानी एक हकीकत है, और अकल्पनीय और अविश्वसनीय है।इस कहानी पर हो सकता है कि आपको यकीन ना हो लेकिन ये सत्य है।

इस शहीद की आत्मा भटके सैनिकों को रास्ता दिखती है,और उनकी रक्षा करती थी।

आपने बहुत पढ़ा होगा किसी actor and actress या फिर किसी नेता और cricketer के बारे में लेकिन आप के पास जरा सा भी समय हो तो इस वीर जवान के बारे में पूरा जरूर पढियेगा। ये एक ऐसा देश का सूपुत्र था जिसके शहीद होने के बाद भी जिसकी आत्मा देश की सीमा पर प्रहरा देती रही।

एक ऐसा भी वीर शहीद था जो शहीद होने के बाद भी जिसकी शहीद आत्मा भारत-चीन सिमा पर देश और देश के जवानों की रक्षा करती थी। baba harbhajan singh
Baba harbhajan singh


मैं जिस वीर की बात कर रहा हूँ उसका नाम हरभजन सिंह था। 

नमस्कार दोस्तों मैं अनुपम सिंह और आपका आजके इस देश भक्ति भरे वीर शहीद के कहानी में स्वागत है,दोस्तों अगर इस article में आपको इस देश के वीर जवान के देश भक्ति भरी कहानी आपको जरा सी भी अच्छी लगे तो कृपया इसे जरूर और भी लोगो तक शेयर करे जिससे इस वीर की कहानी को और भी लोग जान पाए आपने बहुत शेयर की होगी किसी नेता या actor या actress की कहानी को या फिर चुटकले  लेकिन आज बारी है इस देश की शहीद की तो खूब शेयर करे इस हकीकत भरी कहानी को जिससे लोग इस शहीद के बारे में जान पाए।

पूरा जरूर पढियेगा!


दोस्तों बाबा हरभजन सिंह के बारे में बताने से पहले मैं आपको ये बता देना चाहता हूँ की इस article के द्वारा कतई मेरा ये उद्देश्य नहीं है कि अंधविस्वास को मैं बढ़ावा  दे रहा हूँ आप  yah bat शायद achchhi tarah se jante होंगे की देश की सेना में अंधविस्वास का कोई भी जगह नहीं है,लेकिन इस article में जो बता रहा हूँ एक सत्य है जिसे देश की सेना और साथ ही हमारा पड़ोसी देश चीन भी इस बात को मानता है।

बाबा हरभजन सिंह की देश भक्ति की कहानी!


तो दोस्तों इस कहानी की शुरुवात होती है 30 अगस्त 1946 पाकिस्तान के पंजाब में इनका जन्म हुआ,दोस्तों जब बाबा हरभजन सिंह का जन्म हुआ था तो उस समय देश देशभक्ति में डूबा हुआ था और शायद इसी लिए उनके अंदर देश के लिए कुछ कर गुजरने की ललक शुरू से ही थी।


एक ऐसा भी वीर शहीद था जो शहीद होने के बाद भी जिसकी शहीद आत्मा भारत-चीन सिमा पर देश और देश के जवानों की रक्षा करती थी। baba harbhajan singh
Baba harbhajan singh


हलाकि देश के विभाजन पर वे देश में ही आ गए और उन्होंने अपनी 10वीं की पढाई पूरी करने के बाद बतौर सैनिक देश के लिए देश सेवा करना शुरू किया वह Amritsar में सैनिक बने और Punjab regiment को join कर लिया,
30 june 1965 में उन्हें 14 राजपूत रेजीमेंट के साथ पोस्ट कर दिया गया और वहा पर उन्हें भारत-पाकिस्तान के युध्द में हिसा मिला और ये पहला मौका था जो उन्हें युध्द में शामिल किया गया।
और आगे चल कर उन्हें 18 राजपूत रेजीमेंट में ट्रांसफर कर दिया गया,और इस रेजीमेंट के अंतर्गत 3 साल तक जी जान लगाकर उन्होंने काम किया।

एक ऐसा भी वीर शहीद था जो शहीद होने के बाद भी जिसकी शहीद आत्मा भारत-चीन सीमा पर देश और देश के जवानों की रक्षा करती थी।


दोस्तों बाबा हरभजन सिंह की आत्मा की कहानी में कितना सच्चाई ये तो मैं नहीं जानता लेकिन सेना में अंधविस्वास का कोई भी जगह नही होता है।
लेकिन सेना ने ही इस बाद को बताई है इस लिए पूरा जरूर पढियेगा।

बाबा हरभजन सिंह की मृत्यु कैसे हुई!


 और 4 October 1968 में उनकी मृत्यु हो गयी उनके मृत्यु के पीछे की वजह ये बताई जाती है कि जब वह 14,500 फ़ीट की ऊँचाई पर नाथुला नाम के mountain पास पर तैनात थे, जो की तिब्बत और सिक्किम के सीमाओं के बीच में है।


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तब सेना के लिए समान ले जाते वक्त वह खच्चर के साथ फिसल गए और बर्फीले नाले में बह गए और उनकी मृत्यु हो गयी,कहा जाता ही की सेना ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था लेकिन सच्चाई का पता चलते ही सेना ने इस भूल को सुधारा और उन्हें शहीद का दर्जा दिया।


सेना के लोगो के मुताबिक कहा जाता की उनकी मृत्यु के बाद उनका मृत शरीर सेना के खूब ढूढने के बाद भी नहीं मिला तब तीन दिन के बाद बाबा हरभजन सिंह अपने ही साथ के सिपाही मित्र के सपने में आये और अपने मृत शरीर का ठिकाना बताया।
Baba harbhajan singh,एक ऐसा भी वीर शहीद था जो शहीद होने के बाद भी जिसकी शहीद आत्मा भारत-चीन सिमा पर देश और देश के जवानों की रक्षा करती थी।
Barfila pahad

तब उनका मित्र अपने साथी सिपाहियों से ये बात कही तो कुछ मानने को तैयार ही नहीं हुए और कुछ हुए, तब वे लोग बाबा हरभजन सिंह के मृत शरीर को ढूढ़ने निकल गए, जैसा बाबा ने सपने में बताया था ठीक उसी जगह पर उनका मृत शरीर पाया गया। और उन्होंने ये भी बताया की उनके दाहिनी पैर की हड्डी टूट गयी है जो की सत्य साबित हुआ,तब उनका अंतिम संस्कार किया गया।


बाबा के मृत्यु के कुछ दिनों के बाद वह पुनः  अपने साथी शिपाही के सपने में आये और बताया कि भले ही मेरा शरीर खत्म हो गया है,  लेकिन मैं अभी आगे भी on duty रहूँगा, और देश की सीमा पर देश के सैनिकों और देश की रक्षा करता रहूँगा, और हमारा मंदिर और समाधी बना देना ।

शुरुवात में तो कोई इस बात को मन का बहम समझ कर मनना हीं नही चाहता था लेकिन जब साथी शिपाहियो के साथ कुछ ऐसा घटित होने लगा जो अकल्पनीय और अविश्वसनीय था।

जब सैनिक सीमा के लिए देश की सुरक्षा के लिए निकलते तो उनके साथ अजीब सी बातें होती जैसे अगर किसी के साथ कोई घटना होने वाली होती या फिर उनसे कोई गलती होने वाली होती तो बाबा पहले ही उसके सपने में आ कर उसे सावधान कर देते ,यहा तक की जब सैनिक सिमा की सुरक्षा कर रहे होते तो कोई अगर झपकी भी लेता तो उसे थप्पड़ लगा देते,अगर कोई सैनिक duty के दौरान कोई गलती भी करता तो उसे सजा भी देते।

एक ऐसा सैनिक जो और साथी शिपाहियो के साथ देश के सिमा की रक्षा करता लेकिन नजर नहीं आता जिससे साथी शिपाहियोका हौसला बना रहता क्योकि उन बर्फीले पहाड़ो और तुफानो में duty करना बिना हौसले के कठिन होता है जब सैनिक सीमा पर प्रहरा देने निकलते तो बिल्कुल निडर रहते क्योकि वे ये जानते थे की मेरा कोई बाल भी बाका नहीं कर सकता क्योंकि उनके साथ बाबा हरभजन सिंह होते थे।
एक ऐसा भी वीर शहीद था जो शहीद होने के बाद भी जिसकी शहीद आत्मा भारत-चीन सिमा पर देश और देश के जवानों की रक्षा करती थी।
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नाथुला में बाबा हरभजन सिंह का मंदिर बनाया गया इस मंदिर में बाबा के जूते वर्दी हर एक सामान जो बाबा हरभजन सिंह इस्तेमाल करते बाबा को सुबह शाम नास्ता खाना तक चढ़ाया जाने लगा और शाम होते ही मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते क्योकि इस समय बाबा के duty करने का वक्त होता।

सेना में एक सैनिक पर जितने भी नियम लागू होते है वे सब बाबा पर लागू होने लगे उन्हें साल में 2 महीने की छुट्टी दी जाती जिस समय बाबा छुट्टी पर होते उस समय भारत-चीन सीमा पर निगरानी बाढा दी जाती क्योकि इस समय में बाबा छुट्टी पर होते।

बाबा को सितम्बर के महीने में छुट्टी दी जाती और बाबा के फोटो को दो सैनिक सम्मान के साथ लेकर जीप में पास के रेलवे स्टेशन से उनके गांव तक छोड़ने ले जाते उनके साथ उनका पूरा सामान ले जाया जाता बाबा के नाम से ट्रेन में टिकट भी बुक की जाती। और उन्हें दो सैनिक लेने भी जाते उनके घर, ये सिलसिला 2006 tak चलता रहा उनके रिटायरी मेन्ट तक।

बाबा हरभजन सिंह पर चीन को भी हुआ विस्वास!

चीन को कई बार सीमा पर कोई सफेद कपड़ो पर घोड़े पर प्रहरा देते दिखा तो चीन ने भारत को इस बात की चिठ्ठी लिखी की आप अपने आदमी को सीमा से हटा लीजिये लेकिन सेना की तरफ से कोई भी सैनिक वहा नहीं होता तब चीन को इस बात का विस्वास दिलाने के लिए बाबा चीन के सैनिकों के सपने में भी गए उन्हें अपने बारे में बताया कि ओ मैं ही होता हूँ सीमा पर और कई बार बाबा चीनी सैनिकों के सपने कुछ बाते बताई जो हाकिकित में सच निकली तब चीन भी विस्वास करने लगा

जब भी भारत और चीन के बीच  flag meeting होती तब भारत और चीन की तरफ से एक कुर्सी खाली रख्खी जाती बाबा हरभजन सिंह के लिए जिससे हरभजन सिंह के नाम के आगे बाबा लगा दिया गया और उन्हें बाबा हरभजन सिंह के नाम से जाना जाने लगा।

बाबा के निष्फल भावना से duty करते देख के सेना ने सेना के नियम के मुताबिक उनकी रिटायरी को एक साल और भी बढ़ा दिया और बाबा को 2005 के जगह 2006 में रिटायरी देदी दर्शल सेना में इस नियम का प्रावधान है कि किसी सैनिक के कार्य को देख कर उसके रिटायरी को बढ़ाया जा सकता है।

आज भी बाबा के उस मंदिर में लोगो का भीड़ लगा रहता है क्योंकि बाबा और भी लोगो की मनोकामना पूरा करते।

पूरा पढ़ने के लिए धन्यबाद !

तो दोस्तों ये थी बाबा हरभजन सिंह की कहानी अगर आपको अच्छी लगी हो तो कृपया इसे और भी लोगो तक शेयर करे जिससे इस वीर शहीद सैनिक के बारे में और भी लोग जान सके अपने बहुत शेयर की होगी किसी नेता actor या क्रिकेटर की जीवन कहानी अब देश के लिए शहीद होने वाले इस वीर की बारी है खूब शेयर करिये इसे 


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